घर से दूर नौकरी शायरी

घर से दूर नौकरी शायरी

घर से दूर नौकरी शायरी उन लोगों के दिल की बात है, जो अपने परिवार से दूर रहकर काम करते हैं। नौकरी और अच्छे भविष्य के लिए कई लोगों को अपना घर, गाँव और परिवार छोड़कर दूसरे शहर जाना पड़ता है। बाहर से सब कुछ ठीक लगता है, लेकिन अंदर से अपनों की याद बहुत सताती है। खासकर माँ के हाथ का खाना, पापा की बातें, भाई-बहन के साथ बिताया समय और घर की छोटी-छोटी खुशियाँ बहुत याद आती हैं।

इन शायरियों में उसी दूरी का दर्द और घर लौटने की चाह महसूस होती है। कभी त्योहार पर घर की याद आती है, तो कभी रात में परिवार की तस्वीर देखकर आँखें नम हो जाती हैं। घर से दूर नौकरी करने वालों के लिए ये शायरी उनके दिल में छिपे जज़्बातों को आसान शब्दों में बयां करती हैं। अगर आप भी नौकरी के कारण अपनों से दूर हैं, तो ये भावुक शायरियाँ आपके दिल को जरूर छूएंगी।

🏠 घर की यादों से निकले अल्फ़ाज़

घर से दूर नौकरी की वो शायरी,
जो दिल की बात कह जाए

रोज़गार के लिए दूर शहर में रहने वालों के नाम, उन खामोश एहसासों के कुछ लफ़्ज़ जो घर लौटने की चाह जगाते हैं।

01
घर की याद
शहर की भीड़ में दिन तो कट जाता है, रात होते ही घर का आँगन याद आता है।
02
माँ की याद
तनख्वाह मिलते ही खुशियाँ तो बहुत होती हैं, माँ के हाथ की रोटी के आगे सब छोटी होती हैं।
03
परदेस की जिंदगी
कमाने निकले थे अपने सपनों का घर बनाने, खुद ही किराए के कमरे में रह गए मुस्कुराने।
04
बाबूजी की याद
बाबूजी की आवाज़ फोन पर सुनकर ठहर जाता हूँ, दो पल बात करके फिर खुद को समझाता हूँ।
05
छुट्टी का इंतज़ार
कैलेंडर में छुट्टी की तारीख ढूँढता रहता हूँ, घर जाने के ख्वाबों में रोज़ थोड़ा जीता रहता हूँ।
06
कमाने की मजबूरी
दिल चाहता है अपनों के पास बैठा रहूँ, हालात कहते हैं कि दूर रहकर कमाता रहूँ।
07
अकेली रातें
कमरे में सामान बहुत है, मगर अपनापन नहीं, नौकरी ने सब कुछ दिया, बस घर जैसा सुकून नहीं।
08
अपनों से दूरी
वीडियो कॉल में चेहरे करीब दिखाई देते हैं, मगर छूने को वही रिश्ते मीलों दूर दिखाई देते हैं।
09
घर की खुशबू
त्योहार आते हैं तो बाज़ार सजते बहुत हैं, पर घर की रसोई के वो दिन सबसे ज्यादा याद आते हैं।
10
सफलता का सफर
जिस मंज़िल की खातिर गाँव पीछे छोड़ आया, हर कदम ने मुझे अपनों का मतलब और समझाया।
11
त्योहारों का दर्द
दूसरों के घरों में दीपों की कतार देखता हूँ, अपने घर का त्योहार तस्वीरों में देखता हूँ।
12
बचपन की याद
इस शहर ने उम्र के कई साल चुरा लिए, गाँव की गलियों ने आज भी बचपन संभाल रखा है।
13
घर लौटने की चाह
सूटकेस हमेशा तैयार सा रहता है कमरे के कोने में, शायद दिल भी घर जाने को तैयार बैठा है हर मोड़ पे।
14
परिवार के लिए
मेरी मेहनत का मतलब बस इतनी सी बात है, मेरे घरवालों के चेहरे पर मुस्कान बनी रहे।
15
दूर शहर की जिंदगी
यहाँ पहचान बनाने में साल गुजर जाते हैं, वहाँ अपने बिना एक-एक दिन भारी लगते हैं।
16
दिल की बात
रोज़गार ने मुझे शहर का रास्ता दिखा दिया, मगर दिल ने हर रोज़ घर का रास्ता याद रखा।
🏠 अपनों से दूर रहने वालों के नाम

कमाने की राह में घर से दूर रहने की शायरी

नौकरी के लिए घर से दूर रहने वाले दिलों की खामोश बातें और अपनों की यादों से भरे जज़्बात। अगर आपको पिता की याद भी सताती है, तो पापा की याद में शायरी भी पढ़ सकते हैं।

01
घर की याद
परदेस की कमाई ने हाथ तो भर दिए, मगर घर के रिश्तों की गर्माहट कम कर दी।
02
माँ की याद
हज़ारों स्वाद चखे इस शहर में आकर, माँ के हाथ का निवाला आज भी सबसे प्यारा है।
03
तनहाई
कमरे की खिड़की से रोज़ शहर निहारता हूँ, मन ही मन अपने गाँव का रास्ता पुकारता हूँ।
04
पापा की याद
जेब में पैसे बढ़ते गए उम्र के साथ, पापा का सहारा याद आता गया हर कदम के साथ।
05
कमाने की मजबूरी
कुछ सपने घर की देहरी पर पूरे नहीं होते, इसलिए कुछ अपने शहरों से दूर जाकर रोते हैं।
06
परिवार
घर की तस्वीर देखकर मुस्कुरा लेता हूँ, फिर उसी तस्वीर को सीने से लगा लेता हूँ।
07
गाँव की याद
शहर की रफ्तार में खुद को दौड़ाता हूँ, गाँव की धीमी शामों को दिल में बचाता हूँ।
08
छुट्टी का इंतज़ार
हर महीने तारीखों का हिसाब लगाता हूँ, कब घर जाऊँगा, बस यही सोचता रहता हूँ।
09
त्योहारों का दर्द
त्योहार पर नई शर्ट पहनकर भी दिल उदास रहता है, क्योंकि खुशी अपनों के साथ बैठकर ही खास लगती है।
10
सपने
अपने अरमानों को पूरा करने निकला था, रास्ते में घर की याद से कई बार दिल भर आया।
11
भाई-बहन
बचपन की लड़ाइयाँ अब बहुत याद आती हैं, दूर शहर में भाई-बहन की कमी सताती है।
12
रिश्तों की कमी
यहाँ हाल पूछने वाले बहुत मिल जाते हैं, मगर हाल समझने वाले घर पर ही मिलते हैं।
13
दूरियाँ
मीलों की दूरी ने एक बात सिखा दी, अपने पास हों तो साधारण शाम भी खास होती है।
14
रात की यादें
सोने से पहले जब सब याद आने लगता है, तब अपना शहर भी अनजान सा लगने लगता है।
15
मेहनत
थककर भी अगले दिन काम पर निकल जाता हूँ, क्योंकि घर की उम्मीद को कमजोर नहीं पड़ने देता हूँ।
16
घर वापसी
एक दिन इस शहर को अलविदा कहना है, और फिर हमेशा के लिए अपनों के पास रहना है।
🏠 अपनों से दूर कमाने वालों के नाम

घर से दूर नौकरी शायरी 2 Line

नौकरी की वजह से घर से दूर रहने वालों के उन एहसासों के लिए, जो अक्सर शब्दों में नहीं आ पाते। बीते दिनों और पुरानी यादों का दर्द महसूस हो तो गुजरा हुआ वक्त शायरी भी पढ़ सकते हैं।

01
घर की याद
नौकरी की दौड़ में शहर तो अपना बना लिया, मगर घर जैसा सुकून कहीं और नहीं मिला।
02
माँ की याद
ऑफिस से लौटकर दरवाज़ा खुद ही खोलता हूँ, माँ होती तो शायद पूछती, बेटा खाना खाया?
03
परिवार
फोन पर सब कहते हैं अपना ख्याल रखना, कोई ये नहीं कहता कि जल्दी वापस आ जाना।
04
अकेलापन
दिनभर लोगों के बीच रहकर भी अकेला सा लगता है, क्योंकि अपना कहने वाला कोई पास नहीं होता।
05
छुट्टी
छुट्टी का नाम सुनते ही चेहरे पर रौनक आ जाती है, क्योंकि उस दिन दिल को भी सफर करना होता है।
06
पापा की याद
पापा से बात होती है तो बस खर्च पूछते हैं, शायद उनकी चिंता भी प्यार जताने का तरीका है।
07
त्योहार
त्योहार की रौनक होटल और बाज़ार में बहुत देखी, पर घर की चौखट वाली खुशी कहीं नहीं मिली।
08
गाँव की याद
शहर की ऊँची इमारतें रोज़ सामने आती हैं, मन फिर भी कच्चे घर की छत तलाशता है।
09
रात का दर्द
रात की खामोशी में सबसे ज्यादा शोर होता है, जब घरवालों की याद दिल के अंदर होती है।
10
कमाई
पैसे घर भेजकर दिल को तसल्ली दे देता हूँ, वरना खुद से पूछूँ तो बहुत कुछ अधूरा लगता है।
11
बहन की याद
बहन की छोटी-सी शिकायत भी अब याद आती है, दूर रहकर समझ आया घर में उसकी आवाज़ कितनी प्यारी थी।
12
कमरे की खामोशी
कमरे में लौटता हूँ तो दीवारें चुप रहती हैं, घर में लौटता था तो सवालों में अपनापन मिलता था।
13
पुरानी याद
कभी घर की छोटी बातों पर नाराज़ हो जाते थे, आज वही छोटी बातें सुनने को तरस जाते हैं।
14
संघर्ष
चेहरे पर मुस्कान रखकर रोज़ काम पर जाता हूँ, किसे बताऊँ भीतर से कितना घर को चाहता हूँ।
15
अपनों की कमी
यहाँ जरूरत पर लोग मिल जाते हैं, मगर बिना मतलब याद करने वाले अपने नहीं मिलते।
16
घर का खाना
महंगे खाने में स्वाद तो बहुत मिलता है, पर घर की दाल में जो अपनापन था वो नहीं मिलता।
17
वापसी का सपना
सपनों की कीमत में अपनों से दूरी भी देनी पड़ी, अब बस इतनी चाहत है कि मेहनत रंग लाए और घर लौटूँ।
18
दिल की बात
दूर रहना मेरी मजबूरी है, मोहब्बत नहीं बदली, घर से जितना दूर हूँ, उतना ही घर दिल में बसा है।

निष्कर्ष

घर से दूर नौकरी करना आसान नहीं होता। अच्छी जिंदगी और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए इंसान अपने घर से दूर चला जाता है, लेकिन अपनों की याद हमेशा दिल में रहती है। घर से दूर नौकरी शायरी उसी एहसास को शब्दों में बयां करती है। अगर इन शायरियों में आपको अपना दर्द या घर की याद नजर आई हो, तो इन्हें अपने उन दोस्तों और अपनों के साथ जरूर शेयर करें, जो नौकरी के लिए अपने घर से दूर रहते हैं।

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